अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से अपने आक्रामक व्यापारिक नीतियों के लिए जाने जाते रहे हैं। उनकी टैरिफ़ नीति ने न केवल अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कई नए समीकरण बनाए। इस लेख में हम ट्रंप की टैरिफ़ रणनीति के प्रभावों का विश्लेषण करेंगे और देखेंगे कि कैसे उनके फैसलों ने कभी दुश्मन रहे देशों को एकजुट कर दिया।
ट्रंप टैरिफ़: एक झटका जो दोस्ती में बदल गया
ट्रंप प्रशासन ने जब व्यापार पर अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने की नीति अपनाई, तो यह कदम शुरुआत में केवल चीन, कनाडा और मैक्सिको तक सीमित था। लेकिन 2 अप्रैल से लागू नई नीति ने अमेरिका के सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को प्रभावित किया। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देश भी शामिल हैं।
विशेष रूप से दक्षिण कोरिया और जापान, जो दशकों से अमेरिका के सहयोगी रहे हैं, अब खुद को एक अलग स्थिति में पा रहे हैं। अमेरिका, जिसने जापान को आर्थिक महाशक्ति बनने में मदद की और दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया से सुरक्षा प्रदान की, अब उन्हीं देशों पर भारी टैरिफ़ लगा रहा है। इस नए परिदृश्य ने इन देशों को चीन के साथ हाथ मिलाने के लिए मजबूर कर दिया।
दक्षिण कोरिया, जापान और चीन का नया गठबंधन
ट्रंप की टैरिफ़ नीति से परेशान दक्षिण कोरिया और जापान ने चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 31 मार्च को सियोल में तीनों देशों के शीर्ष व्यापारिक मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें आपसी व्यापार को बढ़ाने और अमेरिकी टैरिफ़ से बचने के उपायों पर चर्चा की गई। यह बैठक क्षेत्रीय व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
तीनों देश पहले से ही रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) का हिस्सा हैं, जो एक व्यापक व्यापारिक समझौता है। हालांकि, भारत इस संगठन से अलग हो गया था क्योंकि उसे लगा कि इससे चीन को अनुचित लाभ मिलेगा। लेकिन चीन, जापान और दक्षिण कोरिया अब इस संगठन को और मजबूत करने के प्रयास में जुट गए हैं।
ट्रंप की रणनीति: धमकी या कूटनीति?
डोनाल्ड ट्रंप एक अनुभवी व्यापारी हैं, और उनकी यह नीति एक प्रकार की नेगोशिएशन रणनीति का हिस्सा हो सकती है। पहले वह देशों को भारी टैरिफ़ की धमकी देते हैं और फिर सौदेबाजी के तहत कुछ रियायतें देते हुए अपनी शर्तें मनवाने की कोशिश करते हैं।
ट्रंप ने 26 मार्च को घोषणा की कि अमेरिका में बिकने वाली सभी विदेशी गाड़ियों पर 3 अप्रैल से 25% टैरिफ़ लगाया जाएगा। जापान और दक्षिण कोरिया, जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में गाड़ियां निर्यात करते हैं, इस फैसले से सीधा प्रभावित हुए हैं।
व्यापारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- अमेरिका और जापान के बीच 227 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है, जिसमें जापान को 51 बिलियन डॉलर का लाभ होता है।
- जापान अमेरिका को सबसे अधिक कारें निर्यात करता है, जिससे उसे 41 बिलियन डॉलर की कमाई होती है।
- दक्षिण कोरिया और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में दक्षिण कोरिया का पलड़ा भारी है। अमेरिका दक्षिण कोरिया से 131 बिलियन डॉलर का सामान आयात करता है जबकि केवल 55 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है।
क्या अमेरिका को टक्कर दे पाएंगे ये देश?
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच आपसी व्यापार संतुलित है। ये तीनों देश एक-दूसरे को लगभग समान मात्रा में निर्यात करते हैं और व्यापारिक अधिशेष का अंतर बहुत अधिक नहीं है। हालांकि, अमेरिका अब भी इन देशों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है।
अगर ये देश मिलकर कोई ठोस रणनीति बनाते हैं, तो वे अपने व्यापारिक नुकसान को कम कर सकते हैं। लेकिन अमेरिका का प्रभाव इन पर बना रहेगा, और यही वजह है कि ट्रंप इस तरह की धमकियां देकर अपनी व्यापारिक शर्तों को मनवाने की कोशिश कर रहे हैं।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ़ नीति ने वैश्विक व्यापार में हलचल मचा दी है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अब आपसी सहयोग बढ़ाने की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन अमेरिका की भूमिका अभी भी निर्णायक बनी हुई है।
क्या ये देश मिलकर अमेरिकी टैरिफ़ नीति का मुकाबला कर पाएंगे? या क्या अमेरिका अपनी रणनीति में बदलाव करेगा? आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा।
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