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PM मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाकात: राजनीतिक रणनीति या कूटनीतिक भूल?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता व चर्चित बुद्धिजीवी मोहम्मद यूनुस की हालिया मुलाकात ने भारतीय उपमहाद्वीप में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। BIMSTEC की छठी बैठक के दौरान थाईलैंड के बैंकॉक में हुई यह भेंट अब सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है।

मुलाकात पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

मोहम्मद यूनुस को लेकर हाल के दिनों में भारत विरोधी बयानों और नीतियों को लेकर काफी विवाद रहा है। चीन के एक मंच से “गार्डियन ऑफ इंडियन ओशियन” जैसे बयान देने और भारत विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने के आरोपों के चलते भारतीयों के बीच यूनुस की छवि संदिग्ध बनी है।

ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की उनसे मुलाकात को कुछ लोग कूटनीतिक भूल मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे एक जरूरी राजनीतिक रणनीति करार दे रहे हैं।

BIMSTEC बैठक की पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री मोदी 3 अप्रैल को BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) की छठी बैठक में भाग लेने थाईलैंड पहुंचे। इस बैठक में बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देशों – भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार और थाईलैंड – के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और व्यापार को लेकर 21 बिंदुओं पर सहमति बनी।

बैठक में चर्चा का केंद्र बनी तस्वीर

बैठक के दौरान सामने आई एक तस्वीर जिसमें पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस एक ही डाइनिंग टेबल पर बैठे नजर आए – सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। खासकर बांग्लादेशी मीडिया और मीमर्स ने इस तस्वीर को हथियार बनाकर भारत के प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने की कोशिश की।

भारत की रणनीति क्या रही?

भारत की ओर से यह दावा किया गया कि मुलाकात केवल औपचारिक थी, और उसमें अल्पसंख्यकों की स्थिति, बांग्लादेश के आगामी चुनाव और भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर गंभीर चर्चा हुई।
कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की ट्रंप सरकार द्वारा बांग्लादेश को भारत के हवाले करने की नीति के तहत यह मुलाकात हुई। कुछ रिपोर्ट्स तो यह भी कहती हैं कि पीएम मोदी ने यूनुस को ट्रंप का संदेश दिया – “जल्द चुनाव कराओ और भारत विरोधी बयानबाजी से बचो।”

सोशल मीडिया की जंग

इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर भारत और बांग्लादेश के मीमर्स के बीच एक अलग ही “साइबर युद्ध” छिड़ गया।
जहां बांग्लादेशी यूजर्स ने मोदी को “चायवाला” और यूनुस को “बुद्धिजीवी योद्धा” बताकर प्रचार किया, वहीं भारतीय पक्ष से जवाब में कहा गया – “जब हम अकाउंटेंट रख सकते हैं, तो खुद कैलकुलेट क्यों करें?” (ट्रांसलेटर पर बने मीम्स की प्रतिक्रिया)

क्या यह सही समय था?

यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई जब भारत और बांग्लादेश के संबंध काफी तनावपूर्ण हैं। शेख हसीना सरकार द्वारा भारत समर्थक नीति अपनाने के बावजूद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और भारत विरोधी नैरेटिव सामने आए हैं। ऐसे में यूनुस से इस स्तर की भेंट को लेकर कई लोगों के मन में यह सवाल उठा कि क्या भारत ने अपनी छवि को दांव पर लगाकर यह कदम उठाया?


निष्कर्ष

पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाकात को सिर्फ एक औपचारिक बैठक मान लेना शायद सरल होगा, लेकिन इसके पीछे की कूटनीति और इसके दूरगामी परिणाम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह भेंट एक नई शुरुआत थी या फिर भारत के लिए एक रणनीतिक भूल।


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