हाल ही में सरकार ने सभी लोकसभा सांसदों को बजट 2025 पारित करने के लिए उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही लोकसभा में इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए गिलोटिन का उपयोग करने की घोषणा की गई है। यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है—मार्च 2023 में भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बजट 2024 को पारित करने के लिए गिलोटिन का प्रयोग किया था।
लेकिन गिलोटिन आखिर क्या है, और संसद में इसका क्या महत्व है? आइए विस्तार से जानते हैं।
गिलोटिन: शब्द की उत्पत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ
गिलोटिन शब्द की जड़ें फ्रांस से जुड़ी हैं। मूल रूप से, यह एक उपकरण था जिसका उपयोग फ्रांसीसी क्रांति (1789-1799) के दौरान मृत्यु दंड देने के लिए किया जाता था। इसे इसलिए बनाया गया था ताकि मृत्युदंड को अधिक तेज़ और कम पीड़ादायक बनाया जा सके। इस उपकरण का नाम डॉक्टर जोसेफ-इग्नेस गिलोटिन के नाम पर पड़ा, जिन्होंने इसे पहली बार प्रस्तावित किया था।
हालांकि, भारतीय संसदीय प्रक्रिया में गिलोटिन का मतलब कुछ और ही है।
संसद में गिलोटिन प्रक्रिया क्या होती है?
भारतीय संसद में गिलोटिन का उपयोग वित्तीय कार्यों को गति देने के लिए किया जाता है। बजट सत्र के दौरान, जब संसद के पास समय की कमी होती है, तो सरकार बजट को बिना किसी विस्तृत चर्चा के पारित करने के लिए गिलोटिन प्रक्रिया का उपयोग करती है।
गिलोटिन प्रक्रिया कब और क्यों लागू होती है?
- बजट पेश होने के बाद संसद लगभग 3 सप्ताह के लिए स्थगित हो जाती है।
- इस दौरान स्थायी समितियां (Standing Committees) विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों (Demand for Grants) की समीक्षा करती हैं।
- संसद के फिर से शुरू होने पर, कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee – BAC) महत्वपूर्ण मंत्रालयों की पहचान करती है जिनकी अनुदान मांगों पर चर्चा होनी चाहिए।
- अक्सर गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और कृषि मंत्रालय की बजटीय मांगों पर ही विस्तृत चर्चा होती है।
- यदि समय की कमी हो और सभी मंत्रालयों पर चर्चा संभव न हो, तो लोकसभा अध्यक्ष गिलोटिन प्रक्रिया लागू कर सकते हैं।
- इस प्रक्रिया के तहत, बिना किसी बहस या संशोधन के, बाकी सभी अनुदान मांगों पर एक साथ मतदान कर दिया जाता है।
- इससे यह सुनिश्चित होता है कि बजट समय पर पारित हो जाए और सरकार की वित्तीय योजनाएं बाधित न हों।
गिलोटिन प्रक्रिया का महत्व
- सरकार के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक: बजट पारित न होने की स्थिति में सरकार के दैनिक कार्य रुक सकते हैं। गिलोटिन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि ऐसा न हो।
- समय की बचत: यदि सदन में बार-बार गतिरोध हो, तो इस प्रक्रिया से कार्य को तेजी से पूरा किया जा सकता है।
- लोकतांत्रिक संतुलन: सरकार को समय पर बजट पास करने की शक्ति मिलती है, लेकिन प्रमुख मंत्रालयों पर चर्चा की परंपरा बनी रहती है।
अभ्यास प्रश्न (MCQ) – MPPSC / UPSC / अन्य परीक्षाओं के लिए
गिलोटिन प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह भारतीय संसद में बजट सत्र के दौरान एक आम प्रक्रियात्मक अभ्यास है।
- इस शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी क्रांति से हुई थी, जहां इसे मृत्युदंड के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
सही उत्तर चुनें:
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
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निष्कर्ष
गिलोटिन प्रक्रिया संसद में बजट पारित करने की एक महत्वपूर्ण विधायी प्रक्रिया है, जिससे सरकार वित्तीय फैसलों को समय पर लागू कर पाती है। हालांकि, यह प्रक्रिया केवल तभी लागू की जाती है जब समय की कमी हो और सभी अनुदान मांगों पर विस्तृत चर्चा संभव न हो।
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