नमस्कार साथियों!
आज हम चर्चा करने जा रहे हैं एक ऐसे एआई चैटबॉट की, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है—ग्रोक एआई। यह कोई आम चैटबॉट नहीं है, बल्कि इसके जवाबों ने सरकार, पत्रकारों, और कई अन्य लोगों को असहज कर दिया है। ग्रोक बिना किसी फिल्टर के सवालों के जवाब दे रहा है, जिससे यह चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है ग्रोक एआई?
ग्रोक, चैटजीपीटी की तरह ही एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट है, जिसे एक्स (पूर्व में ट्विटर) द्वारा विकसित किया गया है। यह इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं का उपयोग करके बेहद तीखे और स्पष्ट जवाब देता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह निडर होकर जवाब देता है, जिससे कई बार यह विवादों में भी घिर जाता है।
ग्रोक के विवादित जवाब
ग्रोक से जब कुछ राजनीतिक और सामाजिक सवाल पूछे गए, तो इसने बिना किसी लाग-लपेट के जवाब दिए। उदाहरण के लिए:
- भारत का पहला आतंकवादी कौन था? इस सवाल के जवाब में इसने नाथूराम गोडसे का नाम लिया।
- 1915 से 1947 के बीच किसने मर्सी पिटीशन डाली थी? इस पर जवाब आया कि वीर सावरकर ने।
- प्रधानमंत्री ने कितनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं? तो उत्तर मिला—सिर्फ एक।
- क्या प्रधानमंत्री के इंटरव्यू स्क्रिप्टेड होते हैं? जवाब आया—हाँ, अधिकतर।
इस तरह के जवाब आने के बाद, यह साफ हो गया कि ग्रोक सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, किसी से डरता नहीं है।
सरकार और मीडिया की चिंता
ग्रोक ने न्यूज़ चैनलों के बारे में भी बिना झिझक जवाब दिए। जब पूछा गया कि “गोदी मीडिया कौन से चैनल हैं?” तो इसने तुरंत सूची निकाल दी। यह देखकर सरकार और मीडिया दोनों असहज हो गए।
सरकार को यह चिंता सताने लगी कि अगर एक एआई इस तरह से निडर होकर जानकारी सार्वजनिक कर सकता है, तो इससे भविष्य में राजनीति और मीडिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा? विपक्ष भी इससे अछूता नहीं रहा, क्योंकि ग्रोक ने उनके बारे में भी कई चौंकाने वाली जानकारियां दीं।
क्या सरकार ग्रोक को सेंसर कर सकती है?
भारत में आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत सरकार किसी भी ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने का अधिकार रखती है। इसी के तहत, भारत सरकार सहयोग ऐप के माध्यम से ग्रोक के कुछ जवाबों को ब्लॉक कर रही है।
लेकिन, सवाल यह है कि क्या सरकार को ऐसा करना चाहिए? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है, लेकिन इसमें युक्तियुक्त प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) भी हैं।
अगर कोई बयान राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, या देश की अखंडता को नुकसान पहुंचा सकता है, तो उसे रोका जा सकता है। यही वजह है कि सरकार अब ग्रोक को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रही है।
ग्रोक का भविष्य: टेक्नोलॉजी बनाम सेंसरशिप
ग्रोक का तीसरा वर्जन (Grok 3) अब तक का सबसे शक्तिशाली और विवादित वर्जन बन चुका है। यह ह्यूमर और व्यंग्य के साथ जवाब देता है, जिससे लोग इससे जुड़ाव महसूस करते हैं। लेकिन, सरकार और कई अन्य संस्थानों के लिए यह सिरदर्द बनता जा रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर पाएगी? या फिर क्या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अपनी जगह बनाए रखेगा?
निष्कर्ष
ग्रोक एआई ने यह साबित कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल सूचनाएं देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तथ्यों की पड़ताल भी कर सकता है। हालांकि, बिना फिल्टर के जवाब देने से यह विवादों में फंस सकता है, और सरकारें इसे नियंत्रित करने का प्रयास करेंगी।
तो क्या आपको लगता है कि ग्रोक को सेंसर किया जाना चाहिए? या फिर इसे खुली अभिव्यक्ति का माध्यम बने रहने देना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!