Site icon Khabar Buzz

10,000 साल बाद लौटा डायर वुल्फ: अमेरिका की बायोटेक कंपनी ने किया जीनोम एडिटिंग से चमत्कार

वॉशिंगटन: विज्ञान की दुनिया से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका की बायोटेक कंपनी Colossal Biosciences ने दावा किया है कि उसने जीनोम एडिटिंग तकनीक के ज़रिए एक विलुप्त हो चुके जीव – डायर वुल्फ (Dire Wolf) – को दोबारा दुनिया में जन्म दे दिया है। यह वही डायर वुल्फ है जो लगभग 10,000 साल पहले पृथ्वी से पूरी तरह विलुप्त हो गया था।

क्या वाकई फिर से जिंदा हुआ है प्राचीन भेड़िया?

पहली नजर में यह खबर किसी साइंस फिक्शन मूवी जैसी लगती है, लेकिन यह सच्चाई है। हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि विलुप्त डायर वुल्फ को पूरी तरह पुनर्जीवित नहीं किया गया, बल्कि इसके डीएनए की मदद से जीन एडिटिंग के जरिए एक नया जीव विकसित किया गया है, जिसे “डायर वुल्फ 2.0” नाम दिया गया है।

कैसे हुआ यह चमत्कार?

इस प्रोजेक्ट को अंजाम देने के लिए वैज्ञानिकों ने लगभग 11,500 साल पुराने डायर वुल्फ के जीवाश्म से डीएनए सैंपल निकाले। इसके साथ ही 72,000 साल पुराने अन्य जंतुओं के डीएनए को भी प्रयोग में लाया गया। इन जीनोम्स का विश्लेषण कर उन्हें ग्रे वुल्फ (Grey Wolf) के जीनोम से मिलाया गया और फिर CRISPR-Cas9 नामक एडवांस्ड जीन एडिटिंग तकनीक के माध्यम से एक भ्रूण तैयार किया गया।

यह भ्रूण एक पालतू कुत्ते के अंडाणु में प्रत्यारोपित किया गया और उसकी कोख में विकसित किया गया। इस प्रक्रिया के अंत में तीन बच्चों ने जन्म लिया – दो नर Romulus और Remus, और एक मादा Khaleesi, जिनका जन्म क्रमशः अक्टूबर 2024 और जनवरी 2025 में हुआ।

क्या है डायर वुल्फ?

डायर वुल्फ एक विशाल आकार का मांसाहारी भेड़िया था, जो विशेष रूप से उत्तरी अमेरिका के बर्फीले क्षेत्रों में पाया जाता था। इसकी लंबाई 7 फीट तक हो सकती थी और जबड़े की ताकत इतनी होती थी कि यह बड़ी हड्डियों को चबा सकता था। यह ग्रुप में शिकार करने वाला शिकारी था। माना जाता है कि जलवायु परिवर्तन और बर्फीले इलाकों के खत्म होने के कारण यह प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्त हो गई थी।

गेम ऑफ थ्रोन्स से प्रेरणा?

दिलचस्प बात यह है कि इस भेड़िए को ‘डायर वुल्फ’ नाम उस मशहूर फैंटेसी सीरीज Game of Thrones के प्रसिद्ध जीव से प्रेरित होकर दिया गया, जहां यह एक शक्तिशाली और रहस्यमयी प्राणी के रूप में दिखाया गया था।

डायर वुल्फ या मॉडिफाइड ग्रे वुल्फ?

वैज्ञानिक समुदाय में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह तो है ही, लेकिन साथ ही कुछ बहस भी चल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मूल डायर वुल्फ नहीं है, बल्कि ग्रे वुल्फ के जीनोम को मॉडिफाई करके विकसित किया गया एक नया जीव है। इसलिए इसे डायर वुल्फ 2.0 कहा गया है – जो मूल डायर वुल्फ से कई मामलों में मेल खाता है, पर पूरी तरह समान नहीं है।

भविष्य की संभावनाएं और नैतिक सवाल

इस उपलब्धि से यह सवाल फिर उठता है – क्या भविष्य में विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को दोबारा जीवित किया जा सकेगा? डायर वुल्फ की वापसी ने यह दिखाया है कि तकनीक अब उस मुकाम पर है, जहां यह संभव हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही जैव विविधता, नैतिकता और पर्यावरणीय संतुलन जैसे मुद्दे भी विचारणीय हो जाते हैं।

निष्कर्ष

Colossal Biosciences की यह उपलब्धि बायोटेक्नोलॉजी की दुनिया में एक मील का पत्थर मानी जा रही है। इससे न केवल वैज्ञानिकों को विलुप्त प्रजातियों को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि यह जैविक अनुसंधानों की दिशा को भी बदल सकती है।

क्या वास्तव में विज्ञान अब मृत प्रजातियों को वापस ला सकता है? या यह सिर्फ तकनीकी जादू है जो अतीत की एक झलक दिखा रहा है? यह तो आने वाला समय बताएगा।

Exit mobile version