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सुनीता विलियम्स की 286 दिन की अंतरिक्ष यात्रा: एक हफ्ते का मिशन 9 महीने तक क्यों खिंच गया?

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में 286 दिन बिताने के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापसी की। यह मिशन केवल एक सप्ताह का होना था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण इसे लंबा खींचना पड़ा। उनकी वापसी में देरी के पीछे क्या कारण थे? इतने लंबे अंतरिक्ष प्रवास का उनके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ा? आइए, विस्तार से जानते हैं।


मिशन का सफर: कैसे 1 हफ्ते का प्रवास 9 महीने में बदल गया?

जून 2024 में बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के जरिए सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर को ISS भेजा गया। प्रारंभिक योजना के अनुसार, उनका यह मिशन केवल एक सप्ताह का था। लेकिन, तकनीकी खामियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण उनकी वापसी में लगातार देरी होती गई।

सितंबर 2024 में स्टारलाइनर को खाली लौटा दिया गया क्योंकि उसमें यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर लाने की विश्वसनीयता पर संदेह था। इसके कारण, सुनीता विलियम्स और उनके साथी को ISS में ही रुकना पड़ा।

आखिरकार, फरवरी 2025 में स्पेसX के ड्रैगन यान के जरिए उनकी सफल वापसी हुई।


तकनीकी दिक्कतें जो इस मिशन में आईं

  1. हीलियम लीक की समस्या – प्रक्षेपण से पहले ही यान के प्रोपल्शन सिस्टम में हीलियम रिसाव पाया गया था।
  2. सिस्टम की अन्य तकनीकी खामियां – ISS तक पहुंचने के बाद भी यान में कुछ दिक्कतें सामने आईं।
  3. सितंबर 2024 में खाली लौटाया गया स्टारलाइनर – यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे पृथ्वी पर वापस भेज दिया गया।
  4. वापसी के लिए बैकअप योजना की कमी – अंतरिक्ष एजेंसियों के पास तत्काल वापसी का कोई सुरक्षित विकल्प उपलब्ध नहीं था।

रिकॉर्ड-ब्रेकिंग मिशन

इस अनियोजित देरी के कारण, सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने ISS पर 286 दिनों का नया रिकॉर्ड बनाया। हालांकि, यह अब तक का सबसे लंबा मिशन नहीं था।

कुछ प्रमुख अंतरिक्ष मिशन रिकॉर्ड:


अंतरिक्ष में लंबा समय बिताने के प्रभाव

विज्ञान के नजरिए से, यह मिशन अंतरिक्ष में मानव शरीर और मन पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।

मुख्य प्रभाव:

  1. हड्डियों की कमजोरी – गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति से हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है।
  2. मांसपेशियों की शक्ति घटती है – भारहीनता के कारण मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
  3. मानसिक प्रभाव – लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहने से मनोवैज्ञानिक बदलाव देखने को मिलते हैं।
  4. हृदय स्वास्थ्य पर असर – रक्त संचार में बदलाव के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
  5. विकिरण का खतरा – पृथ्वी के वातावरण के बाहर रहने से विकिरण के संपर्क में आने का जोखिम बढ़ जाता है।

वापसी के बाद रिकवरी प्रक्रिया

अंतरिक्ष में 286 दिनों के बाद पृथ्वी पर लौटने के बाद, शरीर को दोबारा सामान्य स्थिति में आने में लगभग 3 महीने लग सकते हैं।

संभावित चुनौतियां:


इस मिशन से मिली सीख

इस मिशन से हमें कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं:

  1. बेहतर तकनीकी परीक्षण की जरूरत – मिशन लॉन्च से पहले यदि सभी संभावित समस्याओं की गहराई से जांच की गई होती, तो यह संकट टाला जा सकता था।
  2. अंतरिक्ष में सुरक्षित वापसी के लिए वैकल्पिक योजनाएँ आवश्यक हैं।
  3. लंबे मिशनों के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत – यह मिशन मंगल जैसे भविष्य के अभियानों की तैयारी के लिए उपयोगी साबित होगा।

एक सवाल आपके लिए!

अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने का रिकॉर्ड किसके नाम है?

A) अमेरिका
B) चीन
C) रूस
D) भारत

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निष्कर्ष

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का यह मिशन अंतरिक्ष अभियानों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। यह मिशन न केवल तकनीकी चुनौतियों का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अंतरिक्ष में मानव शरीर किस प्रकार प्रतिक्रिया करता है।

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