नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका Khabar Buzz पर! इतिहास की गहराइयों में एक बार फिर हलचल मच गई है। हाल ही में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन के एक बयान ने न केवल राजनीतिक बहस को जन्म दिया बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों की पुनः समीक्षा की जरूरत भी खड़ी कर दी है। उन्होंने राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहकर संबोधित किया, जिससे पूरे देश में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर कई चर्चाएं हो रही हैं। हाल ही में औरंगजेब की कब्र से जुड़ा विवाद और फिल्म छावा की रिलीज़ के बाद महाराष्ट्र में हिंसा देखने को मिली थी। अब राणा सांगा पर दिए गए बयान ने भारतीय इतिहास की व्याख्या को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सपा सांसद का बयान और उसकी प्रतिक्रिया
राज्यसभा में दिए गए अपने भाषण में रामजी लाल सुमन ने हिंदू राजाओं और बाबर के वंशजों को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने कहा:
“मुसलमानों में बाबर का डीएनए है, लेकिन हिंदुओं में गद्दार राणा सांगा की संतानें हैं। बीजेपी वालों को यह तय करना चाहिए कि वे बाबर की आलोचना करना चाहते हैं या राणा सांगा की।”
इस बयान के बाद से विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रकट किया है। राणा सांगा को राजपूत समुदाय और कई अन्य वर्गों में राष्ट्रवादी योद्धा के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ संघर्ष किया। ऐसे में उन्हें ‘गद्दार’ कहे जाने पर ऐतिहासिक सत्यता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राणा सांगा: एक पराक्रमी योद्धा
राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्राम सिंह था। वह मेवाड़ के सिसोदिया वंश के शासक थे और भारतीय इतिहास में वीरता व त्याग के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने मुगलों और दिल्ली सल्तनत के खिलाफ कई युद्ध लड़े। उनके शरीर पर 80 से अधिक घावों के निशान थे, जो उनकी युद्धकला और बलिदान का प्रमाण थे।
उनका शासन काल 1508 से 1527 तक रहा। इस दौरान उन्होंने गुजरात, मालवा और दिल्ली सल्तनत के खिलाफ निर्णायक लड़ाइयाँ लड़ीं। उनकी महत्वाकांक्षा थी कि दिल्ली पर एक शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य स्थापित किया जाए।
क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत बुलाया था?
इस पूरे विवाद का केंद्र यह है कि क्या वास्तव में राणा सांगा ने बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण दिया था?
1. बाबरनामा का उल्लेख
बाबर की आत्मकथा बाबरनामा में उल्लेख मिलता है कि जब वह काबुल में था, तो राणा सांगा की ओर से एक दूत आया जिसने बाबर को भारत आने के लिए आमंत्रित किया। इस कथन के आधार पर यह कहा जाता है कि राणा सांगा ने बाबर को लोदी वंश के खिलाफ बुलाया था।
2. ऐतिहासिक स्रोतों की पड़ताल
हालांकि, इस दावे का कई इतिहासकारों ने खंडन किया है। उनके अनुसार:
- राणा सांगा ने पहले ही इब्राहिम लोदी को दो बार हराया था, तो उन्हें बाबर की मदद की आवश्यकता नहीं थी।
- बाबरनामा विजेता का दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, इसलिए उसमें पूर्वाग्रह हो सकता है।
- नई एनसीईआरटी की इतिहास की किताबों से यह दावा हटा दिया गया है कि राणा सांगा ने बाबर को बुलाया था।
बयाना और खानवा के युद्ध
1526 में बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली पर कब्जा कर लिया। इसके बाद, राणा सांगा ने बाबर से युद्ध किया।
- बयाना का युद्ध (1527): इसमें राणा सांगा की सेना ने बाबर के खिलाफ जीत हासिल की।
- खानवा का युद्ध (16 मार्च 1527): बाबर ने अपनी रणनीति बदली, इसे ‘जिहाद’ घोषित किया और अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाया। इस युद्ध में राणा सांगा वीरता से लड़े लेकिन बाबर की तोपखाने और युद्धनीति के आगे पराजित हुए।
इतिहासकारों की राय
- यदुनाथ सरकार के अनुसार, बाबर की तोपें भारतीय सेनाओं के लिए नई रणनीति थीं, जिससे उसे जीत मिली।
- सतीश चंद्र लिखते हैं कि राणा सांगा, बाबर को भारत से निकालना चाहते थे, लेकिन बाबर ने उन्हें धोखा दिया।
- गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने कहा कि बाबर ने राणा सांगा से संपर्क किया था, न कि राणा सांगा ने उसे बुलाया था।
क्या राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहना उचित है?
इतिहास के तथ्यों को देखते हुए राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहना पूरी तरह अनुचित प्रतीत होता है।
- उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ राजपूत योद्धाओं को एकजुट किया।
- दिल्ली पर हिंदू सत्ता स्थापित करने के लिए संघर्ष किया।
- बाबर से लड़ते हुए अपनी मातृभूमि के लिए बलिदान दिया।
ऐसे में, एक महान योद्धा को राजनीतिक कारणों से ‘गद्दार’ कहना इतिहास का अपमान करना होगा।
निष्कर्ष
इस पूरे विवाद से एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है – क्या हमें इतिहास को राजनीति से प्रेरित होकर तोड़-मरोड़कर देखना चाहिए?
इतिहास हमें जोड़ता है, न कि तोड़ने के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। राणा सांगा एक वीर योद्धा थे, जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों से भारत की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्हें ‘गद्दार’ कहना केवल ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास है।
आपका क्या कहना है?
क्या आप मानते हैं कि राणा सांगा को लेकर यह विवाद इतिहास के साथ अन्याय है? हमें कमेंट में अपनी राय बताएं।
धन्यवाद! Rana Sanga: Hero or Traitor? Thank you!
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