हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने विदेशों में रह रहे पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए कुछ बेहद विवादास्पद और भड़काऊ बयान दिए। इन बयानों ने न सिर्फ भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को हवा दी, बल्कि एक बार फिर “द्विराष्ट्र सिद्धांत” और कश्मीर मुद्दे पर बहस छेड़ दी है।
जनरल आसिम मुनीर ने क्या कहा?
- “पाकिस्तान मदीना जैसा इस्लामिक राष्ट्र है”
जनरल मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान का निर्माण एक धार्मिक उद्देश्य के तहत हुआ है और यह देश मुसलमानों के लिए एक पवित्र स्थल के समान है। - हिंदुओं के खिलाफ अपमानजनक बयान
उन्होंने कहा कि “हिंदू और मुसलमान हर मायने में अलग हैं” और पाकिस्तान को हमेशा अपनी इस्लामिक पहचान को बनाए रखना चाहिए। - कश्मीर और बलूचिस्तान पर भड़काऊ टिप्पणी
मुनीर ने भारत को चुनौती देते हुए कहा, “13 लाख भारतीय सैनिक हमें डरा नहीं सकते। पाकिस्तान कश्मीर को कभी नहीं छोड़ेगा।”
भारत की तीखी प्रतिक्रिया
भारत ने इन बयानों को सिरे से खारिज करते हुए सख्त लहजे में जवाब दिया:
- “पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) भारत का अभिन्न हिस्सा है”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई नेताओं ने कहा कि आने वाले समय में PoK को भारत में शामिल किया जाएगा। - “पाकिस्तान का इतिहास उसकी सच्चाई बयां करता है”
1971 में बांग्लादेश बनने की याद दिलाते हुए भारतीय मीडिया और नेताओं ने कहा कि पाकिस्तान की नीतियां पहले भी असफल रहीं और आज भी देश आंतरिक संकटों से जूझ रहा है। - “भारत चार युद्धों में पाकिस्तान को मात दे चुका है”
1947, 1965, 1971 और 1999 के युद्धों में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी है। यह इतिहास जनरल मुनीर के झूठे दावों का जवाब है।
ऐसा बयान क्यों दिया गया?
- पाकिस्तान में गंभीर आंतरिक संकट
आर्थिक संकट, बलूचिस्तान में विद्रोह और PoK में बढ़ता असंतोष – इन सबके बीच सेना प्रमुख ने जनता का ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक मुद्दा उछाला। - इमरान खान बनाम सेना
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना के बीच तनाव चरम पर है। सेना की छवि खराब हो रही है, जिससे बचने के लिए “इस्लामिक पहचान” का सहारा लिया गया। - भारत में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की साजिश
पाकिस्तान की कोशिश है कि भारत में हिंदू-मुस्लिम तनाव पैदा हो, लेकिन भारत ने एकजुटता दिखाते हुए इस बयान की कड़ी निंदा की।
द्विराष्ट्र सिद्धांत की असलियत
- 1947 में भारत का बंटवारा
मोहम्मद अली जिन्ना ने दावा किया था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग राष्ट्र हैं, लेकिन भारत ने धर्मनिरपेक्षता को चुना। - भारत बनाम पाकिस्तान का दृष्टिकोण
भारत में सभी धर्मों को बराबरी का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया। - पाकिस्तान की विफलता का उदाहरण: बांग्लादेश
1971 में बांग्लादेश का बनना इस बात का सबूत है कि सिर्फ धर्म से राष्ट्र नहीं टिकते। आज भी बलूचिस्तान और PoK में अलगाववाद चरम पर है।
निष्कर्ष: क्या भारत को अब निर्णायक कदम उठाने चाहिए?
जनरल आसिम मुनीर का बयान केवल उनकी हताशा और पाकिस्तान की कमजोर स्थिति को उजागर करता है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान के झूठे दावों से डरने वाला नहीं है।
क्या अब समय आ गया है कि भारत PoK को वापस लेने के लिए सख्त कदम उठाए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं ।

